यूपीआई के जरिये फिलहाल निर्धारित समय पर होने वाले लेन-देन और ‘सिंगल-ब्लॉक-एंड-सिंगल-डेबिट’ की सुविधा है. मासिक आधार पर 70 लाख से अधिक स्वत: भुगतान सुविधा का प्रबंधन यूपीआई के जरिये हो रहा है. वहीं आधे से अधिक आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) आवेदनों का प्रसंस्करण यूपीआई में रकम ‘ब्लॉक’ करने की सुविधा से हो रहा है.

Child Plan: बच्चों की पढ़ाई के लिए कर रहे निवेश तो इन गलतियों से निवेश करने के लिए संदर्भ खाते करिए तौबा

if you are investing for the education of children, then do away with these mistakes

Child Plan: बच्चों की पढ़ाई के लिए कर रहे निवेश तो इन गलतियों से करिए तौबा

शिक्षा की लागत (Cost of Education) से सभी माता-पिता चिंतित होते हैं। लेकिन, इससे भी अधिक चिंता की बात यह है कि जब भविष्य की लागतों की बात की जाती है, तो माता-पिता अपने बच्चों की शिक्षा के लिए निवेश करते समय या तो अनजाने में मुद्रास्फीति (महंगाई) की बात को भूल जाते हैं या इसकी नुकसानदायक प्रकृति को कम समझ लेते हैं। यह समझना बहुत ज़रूरी है कि मुद्रास्फीति, सरल शब्दों में, पैसे की कीमत मे कमी है। अनिवार्य रूप से इसके मायने हैं कि मौजूदा समय में उच्चतर शिक्षा निवेश करने के लिए संदर्भ खाते की लागत मान लेते हैं कि 10 लाख रूपये प्रतिवर्ष है, तो आज से 10-15 वर्ष के बाद जब आपके बच्चे उसी शिक्षा को प्राप्त करने के लिए बड़े हो जाएंगे तो यह लागत ऐसी ही नहीं बनी रहेगी। इस बात की हमेशा सलाह दी जाती है कि शिक्षा की लागत की गणना करते समय, कम से कम 5% प्रति वर्ष न्यूनतम इंफ्लेशन को ज़रूर स्वीकार किया जाना चाहिए। उदाहरण के लिए, यदि मौजूदा लागत 10 लाख रूपये है, तो 15 वर्ष के बाद यही लागत बढ़ कर 21.07 लाख रूपये हो जाएगी। पहले से गणना किए गए अनुमान के साथ, जो कि और कुछ नहीं आपके बच्चे की शिक्षा का वित्तीय लक्ष्य है, माता-पिता यह फैसला कर सकते हैं कि नियमित रूप से कितनी आनुपातिक राशि का निवेश किया जाए ताकि निवेश मूल्य अनुमानों तक पहुंच सके।

निवेश संबंधी फैसलों में देरी करना

दूसरी सबसे आम गलती निवेश करने में देरी करना है। याद रखें, जितनी अधिक आप देरी करेंगे, उतने ही खराब नतीजे प्राप्त होंगे क्योंकि आपके पास निवेश करने के कम वर्ष होंगे और कम समय निवेश करने के लिए संदर्भ खाते में आप कम्पाउंडिंग का लाभ प्राप्त नहीं कर पाएंगे। वास्तव में, यदि आप इससे पहले प्लानिंग की शुरूआत नहीं कर सकते हैं, तो कम से कम जैसे ही आपको यह पता लगता है कि जल्द ही निवेश करने के लिए संदर्भ खाते आप माता-पिता बनने वाले हैं, आपकी निवेश की योजना शुरू हो जानी चाहिए। उदाहरण के लिए, यदि आप अपने बच्चे के जन्म के समय ही इक्विटी म्यूचुअल फंड में एसआईपी के माध्यम से 10,000/-रूपये महीने का निवेश शुरू करते हैं, तो यदि 15% दीर्घकालिक कम्पाउंडिंग वार्षिक रिटर्न को माना जाए, तो जब आपका बच्चा 20 वर्ष का होगा, तो आपके निवेश की कीमत उस समय 1.33 करोड़ रूपये हो चुकी होगी। लेकिन, यदि आप इसी निवेश को उस समय करना शुरू करते हैं जब आपका बच्चा 5 वर्ष या 10 वर्ष का होता है, तो आपके निवेश की कीमत में बहुत तेजी से गिरावट होगी और जब आपका बच्चा 20 वर्ष का हो जाएगा, तो यह क्रमश: 61.73 लाख रूपये और 26.34 लाख रूपये ही रह जाएगी। संक्षेप में, किसी भी प्रकार की देरी से आपके रिटर्न कम होते निवेश करने के लिए संदर्भ खाते हैं।

निवेश को डाइवर्सिफाइड नहीं करना

लंबे समय में किसी एक खास सम्पत्ति श्रेणी में ही समस्त निवेश के बहुत ही खतरनाक परिणाम हो सकते हैं। यह अकसर देखा गया है कि माता-पिता बच्चों के लिए निवेश करने में एक ही सम्पत्ति श्रेणी में बहुत अधिक निवेश पर भरोसा कर बैठते हैं- फिर चाहे वह बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट्स हो, शेयर हों, यूनिट-लिंक्ड बीमा योजनाएं, डेट- म्यूचुअल फंड, इक्विटी म्यूचुअल फंड तथा प्रोपर्टी आदि ही क्यों न हों। इस तरह उनका निवेश एक ही सम्पत्ति श्रेणी में बना रहता है। इससे निवेश करने के लिए संदर्भ खाते न केवल निवेश के साथ जुड़ा जोखिम बढ़ जाता है बल्कि, इसके कारण खराब रिटर्न की प्राप्ति हो सकती है, फिर चाहे कितने ही लंबे समय तक आप निवेश को जारी रखने का विचार रखते हों। निरन्तर, स्थिर दीर्घकालिक रिटर्न प्राप्त करने के लिए डायवर्सिफिकेशन बहुत मायने रखता है। क्योंकि बच्चों के लिए निवेश की प्लानिंग के लिए माता-पिता को आसानी से 15-20 वर्ष का निवेश-समय मिलता है, जो काफी लंबा होता है, परिवारों द्वारा ऐसा निवेश पोर्टफोलियो अपनाना चाहिए जिसमें इक्विटी से संबंधित इंस्ट्रुमेंट्स का निवेश में कम से कम हिस्सा 60-65% होना चाहिए। शेष 35-40% को डेट, प्रोपर्टी या फिर सोने में भी किया जा सकता है। ऐसा करके, जब आपका निवेश पोर्टफोलियो समुचित रूप से डायवर्सिफाइड और संतुलित है, तो आपको किसी भी समय इस बात के लिए चिंतित नहीं होना पड़ेगा।

अगर आप म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) में पैसा निवेश करते हैं तो यह खबर आपके लिए है

Mutual Fund Latest Update

Mutual Fund Latest Update: बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) प्रायोजक बनने के लिये लाभ से जुड़े मानदंड में ढील दी है. म्यूचुअल फंड में नवप्रवर्तन को सुगम बनाने और क्षेत्र के विस्तार के नजरिये से यह कदम उठाया गया निवेश करने के लिए संदर्भ खाते है. भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने म्यूचुअल फंड (How To Become Crorepati) की योजनाओं की परिसंपत्ति और देनदारियों को अन्य योजनाओं से अलग करने का भी निर्णय किया है. यह बैंक खातों और प्रतिभूति खातों को अलग करने की मौजूदा जरूरतों के अलावा है.

एक्जिट लोड और लाभांश भुगतान के लिये समयसीमा में कमी लाने के प्रस्तावों को दी मंजूरी
सेबी के निदेशक मंडल ने भौतिक रूप से प्रमाणपत्र जारी करने की आवश्यकता, अधिकतम स्वीकार्य निकास भार (एक्जिट लोड) और लाभांश भुगतान के लिये समयसीमा में कमी लाने के प्रस्तावों को भी मंजूरी दी. इसके अलावा बोर्ड ने लाभांश भुगतान के लिये अन्य तरीके अपनाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है. साथ ही लाभांश भुगतान में विलम्ब को लेकर ब्याज और जुर्माने के संदर्भ में चीजों को स्पष्ट किया है. प्रायोजक पात्रता के संदर्भ में सेबी ने कहा कि आवेदन करते समय प्रायोजक अगर लाभदायकता से संबद्ध मानदंडा को पूरा नहीं कर रहे, उन्हें भी म्यूचुअल फंड का प्रायोजक होने के लिये पात्र माना जाएगा. यह इस बात पर निर्भर करेगा कि संपत्ति प्रबंधन कंपनी (एएमसी) के नेटवर्थ में योगदान देने के उद्देश्य से नेटवर्थ 100 करोड़ रुपये से कम नहीं हो.

UPI पेमेंट में जुड़ेगी सिंगल-ब्लॉक और मल्टीपल डेबिट सुविधा, ई-कॉमर्स से लेकर शेयरों की खरीद-बिक्री होगी आसान

Single Block functions in UPI: केन्द्रीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बुधवार को यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस UPI पेमेंट सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए ‘सिंगल ब्लॉक’ और ‘मल्टीपल डेबिट’ सुविधा शुरू करने का ऐलान किया है। इस सुविधा के तहत निवेश करने के लिए संदर्भ खाते ग्राहक किसी मर्चेंट के लिए अपने बैंक खाते में एक फिक्स अमाउंट को ब्लॉक करा सकता है। यह ब्लॉक राशि ग्राहक के खाते में शेष राशि का वह हिस्सा होता है, जिसे वे किसी खास काम के लिए बचाकर रखना चाहते हैं।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने मॉनेटरी पॉलसी समीक्षा की जानकारी देते हुए कहा कि UPI की क्षमता बढ़ाकर ग्राहकों को सेवा देने के एवज में भुगतान के लिये राशि अपने खाते में ‘ब्लॉक’ करने की सुविधा देने का निर्णय किया गया है, इससे ई-कॉमर्स और प्रतिभूतियों में निवेश को लेकर भुगतान में आसानी होगी।

सिक्योरिटीज में निवेश करने में आसानी

आरबीआई के अनुसार, इससे ई-कॉमर्स क्षेत्र में भुगतान करने के साथ ही सेकंडरी कैपिटल बाजार में सिक्योरिटीज में निवेश करने में आसानी होगी। इसका मतलब है कि आम आदमी को जल्दी ही होटल बुकिंग, कैपिटल मार्केट में शेयरों की खरीद-बिक्री जैसे कई लेनदेन के लिये UPI के जरिए राशि अपने खाते में ‘ब्लॉक’ करने और भुगतान करने की सुविधा मिलेगी।

आरबीआई ने कहा कि इससे लेन-देन में बड़ा विश्वास पैदा होगा और व्यापारियों को समय पर भुगतान का आश्वासन मिलेगा, जबकि माल या सेवाओं की असल में डिलीवरी हो जाने तक पेमेंट की राशि ग्राहक के खाते में ही रहेगी। अभी ग्राहक यूपीआई के जरिए सिंगल ब्लॉक (Single Block) यानी एक क्लिक पर पेमेंट करके पैसों का भुगतान करते हैं। ग्राहक जब भी जरूरी हो पैसा काटे जाने के लिए अपने बैंक खातों में धनराशि निर्धारित कर संबंधित इकाई के लिए भुगतान को तय कर सकते हैं।

RBI जल्‍द जारी करेगा निर्देश

आरबीआई ने कहा कि इस बारे में भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) को जल्दी ही निर्देश जारी किया जाएगा। गवर्नर शक्तिकांत दास ने भारत बिल भुगतान प्रणाली (BBPS) में सभी भुगतान और संग्रह शामिल कर इसका दायरा बढ़ाने की भी घोषणा की. अभी, बीबीपीएस के पास अलग-अलग समय पर होने वाले भुगतान या व्यक्तियों को मिलने वाले पैसे के भुगतान की सुविधा नहीं है।

इसी के साथ गवर्नर ने यह भी कहा कि पेशेवर सेवा शुल्क भुगतान, शिक्षा शुल्क, टैक्‍स पेमेंट, रेंट कलेक्‍शन इसके दायरे में नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि नई प्रणाली बीबीपीएस मंच को व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) और व्यक्तियों से व्यवसायों (P2M) के व्यापक समूह के लिए आसान बनाएगी। इस संदर्भ में रिजर्व बैंक अलग से दिशानिर्देश जारी करेगा।

ग्राहकों को जल्द मिलेगी विभिन्न भुगतान के लिये अपने खाते में राशि ‘ब्लॉक’ करने की सुविधा

Published: December 7, 2022 2:17 PM IST

Facility to block money in account.

लोगों को जल्दी ही होटल बुकिंग, पूंजी बाजार में शेयरों की खरीद-बिक्री जैसे विभिन्न लेन-देन के लिये यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस) के जरिये राशि अपने खाते में ‘ब्लॉक’ करने और भुगतान करने की सुविधा मिलेगी.

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भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को यूपीआई में एकबारगी राशि ‘ब्लॉक’ करने और उसे अलग-अलग कार्यों के लिये काटे जाने (सिंगल ब्लॉक एंड मल्टीपल डेबिट) की सुविधा देने की घोषणा की. ग्राहक जब भी आवश्यक हो पैसा काटे जाने के लिए अपने बैंक खातों में धनराशि निर्धारित कर संबंधित इकाई के लिये भुगतान को तय कर सकते हैं.

केंद्रीय बैंक के अनुसार, इस व्यवस्था से ई-कॉमर्स और प्रतिभूतियों में निवेश के लिये भुगतान आसान होगा.

आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा की जानकारी देते हुए कहा, ‘‘ यूपीआई की क्षमता बढ़ाकर ग्राहकों को सेवाओं के एवज में भुगतान के लिये राशि अपने खाते में ‘ब्लॉक’ करने की सुविधा देने का निर्णय किया गया है. इससे ई-कॉमर्स और प्रतिभूतियों में निवेश को लेकर भुगतान सुगम होगा.’’

इस व्यवस्था के तहत ग्राहकों को सेवाओं के एवज में भुगतान के लिये राशि अपने खाते में ‘ब्लॉक’ करने की सुविधा मिलेगी और जब भी आवश्यकता हो, संबंधित राशि खाते से काटी जा सकती है. इस सुविधा का उपयोग होटल बुकिंग, पूंजी बाजार में प्रतिभूतियों के साथ-साथ सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद में किया जा सकता है.

एक्सपर्ट की सलाह: शेयर बाजार या किसी भी इंस्ट्रूमेंट में अच्छे रिटर्न के लिए निवेश के पोर्टफोलियो को डाइवर्सिफाई जरूर करें

याद रखें कभी भी एक ही सेक्टर में निवेश न करें। यह आपके जोखिम को तेजी से बढ़ाता है - Dainik Bhaskar

पोर्टफोलियो में विविधता (डाइवर्सिफिकेशन) ट्रेडिंग के क्षेत्र के सबसे प्रसिद्ध विषयों में से एक है। हालांकि, यह सबसे अधिक उपेक्षित भी है, खासकर नए निवेश करने के लिए संदर्भ खाते निवेशकों द्वारा। फिर भी अनुभवी निवेशक अपने पोर्टफोलियो को अच्छी तरह से संतुलित रखते हैं। दुनियाभर के विभिन्न निवेश करने के लिए संदर्भ खाते निवेश करने के लिए संदर्भ खाते बाजारों में समान संपत्ति निवेश में भी विविधता का पालन होता है। ऐसा करने से उनके समग्र रिटर्न में सुधार के साथ-साथ उससे जुड़े जोखिम भी कम होते हैं।

पोर्टफोलियो में विविधता का पालन क्यों जरूरी है?

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