37.साइमन कमीशन का भारतीयों द्वारा विरोध क्यों किया गया ?

Japan Information in Hindi | जापान का सामान्य परिचय

एशिया महाद्वीप के पूर्वी भाग में स्थित जापान प्रशांत महासागर में चाप की आकृति में फैला हुआ अनेक दीपों का एक समूह है। इसका अक्षांशीय विस्तार 30 डिग्री उत्तरी अक्षांश से 45 डिग्री उत्तरी अक्षांश तक तथा 129 डिग्री पूर्वी देशांतर से 146 डिग्री पूर्वी देशांतर के मध्य है। जापान में लगभग 1750 द्वीप है, लेकिन इसके 99 प्रतिशत भाग चार विशाल द्वीपों होकेडो, होन्शू, क्यूशू तथा शिकोकू के अंतर्गत है। जापान का कुल क्षेत्रफल 3,77,727 वर्ग किमी है।

    • जापान को उदीयमान सूर्य का देश (Land of Rising Sun) कहां जाता है, इसका कारण इसकी तीव्र उन्नति है।
    • जापान एक पर्वतीय देश है, जिसके 85 प्रतिशत भाग पर पर्वत श्रेणियां विस्तृत हैं जो टर्शियरी काल की है।
    • जापान के मध्य भाग में फैली हुई ज्वालामुखी पर्वतों की श्रंखला है, मध्यवर्ती भाग की घाटी में स्थित इस ज्वालामुखी पर्वत श्रृंखला को फोसा मैगना कहते हैं। जापान पृथ्वी के कमजोर क्षेत्र में स्थित है।
    • मध्य घाटी के दक्षिण की ओर फ्यूजीयामा जापान का सबसे ऊंचा ज्वालामुखी पर्वत है, जिसकी चोटी 3778 मीटर ऊंची है। जापान के निवासी फ्यूजीयामा को पवित्र पर्वत मानते हैं। फ्यूजीयामा को जापानी लोग स्वर्ग मानते हैं, इसके पूर्व में फिजोकू पर्वत है, जिससे गंधकीय गैस निकलती है, इसे जापान के लोग नर्क कहते हैं। फ्यूजीयामा एवं फिजोकू पर्वत के मध्य नितल क्षेत्र को नर्क से स्वर्ग का मार्ग कहते हैं।
    • पश्चिम की ओर स्थित हिंडा पर्वत श्रेणी जापान की उच्चतम पर्वत श्रेणी है, इसे जापानी आल्पस कहते हैं।
    • यारिंगा हिंडा पर्वत श्रेणी की सर्वोच्च चोटी है, इसे जापान का मैटरहॉर्न कहते हैं।
    • हिंडा पठार हिंडा पर्वत के पश्चिम में स्थित है। यह जापान का सबसे विकसित पठारी प्रदेश है, इसके पश्चिम बिवा झील स्थित है, जो जापान को मीठा जल प्रदान करने वाली सुंदर झील है।
    • क्वांटो मैदान जापान का सबसे महत्वपूर्ण मैदान है। यह होंशु द्वीप के पूर्वी तट पर स्थित है। टोक्यो, याकोहामा नगर यहीं स्थित है।
    • शिनामों जापान की सबसे बड़ी नदी है। यह 369 किमी लंबी है और होंशु द्वीप के उत्तरी भाग से निकलकर पर्वतीय भागों में प्रवाहित होते जापान सागर में गिरती है।
    • जापान में सर्वाधिक वर्षा दक्षिणी पूर्वी तटीय भागों में होती है, जहां वर्षा की औसत 250 सेंमी है। वर्षा की मात्रा ग्रहण काल में अधिक होती है।
    • जून महीने में होने वाली वर्षा को बेर वर्षा कहते हैं। यह बेर के लिए लाभदायक होती है।
    • ग्रीष्म ऋतु में वर्षा दक्षिण पूर्वी मानसून से तथा टायफून चक्रवात से चक्रवातीय प्रकार की होती है। पश्चिमी जापान में शीत ऋतु में वर्षा होती है।
    • गेनया जापान में पाया जाने वाली घास एवं झाड़ियां हैं। जापान वन संपदा में धनी है। यहां चौड़ी पत्ती वाले वन अधिक पाए जाते हैं।
    • जापान में क्यूशू, शिकोशू तथा दक्षिण होंशु में लाल मिट्टी का विस्तार है।

    जापान में कृषि :

      जापान का महत्वपूर्ण खाद्य फसल है। मुख्य चावल उत्पादन क्षेत्र मध्य होंशु, दक्षिण पश्चिम क्यूशू तथा शिकोकू द्वीप है। यहां चावल के तीन प्रकार होते हैं।
    1. हाटा यह तटीय मैदानी भागों में उत्पन्न किया जाता है।
    2. कोटा पहाड़ी भागों में उत्पन्न किया जाता है।
    3. टा दलदली भूमि उत्पन्न किया जाता है।
      • चाय में मुख्यत: हरी चाय का उत्पादन होता है। सैन्या जाति की चाय उत्तम किस्म की चाय है। शिजुनाओं प्रांत जापान का सबसे अधिक चाय का उत्पादन करता है।
      • होकैडो में कई विशाल डेयरी फार्म स्थित है।
      • सर्वाधिक मछली का उत्पादन होकैडो द्वीप के क्षेत्र में होता है। यहां क्यूरिशिवों एवं ओयाशिवों गर्म एवं ठंडी समुद्र जल धाराएं मिलती है, जो मत्स्यन का मुख्य क्षेत्र है। यहां मछलियों के अनुकूल जलवायु पाई जाती है। व्हेल मछली के उत्पादन में जापान विश्व में अग्रणी है।

      Japan Information in Hindi | जापान का सामान्य परिचय

      एशिया महाद्वीप के पूर्वी भाग में स्थित जापान प्रशांत महासागर में चाप की आकृति में फैला हुआ अनेक दीपों का एक समूह है। इसका अक्षांशीय विस्तार 30 डिग्री उत्तरी अक्षांश से 45 डिग्री उत्तरी अक्षांश तक तथा 129 डिग्री पूर्वी देशांतर से 146 डिग्री पूर्वी देशांतर के मध्य है। जापान में लगभग 1750 द्वीप है, लेकिन इसके 99 प्रतिशत भाग चार विशाल द्वीपों होकेडो, होन्शू, क्यूशू तथा शिकोकू के अंतर्गत है। जापान का कुल क्षेत्रफल 3,77,727 वर्ग किमी है।

        • जापान को उदीयमान सूर्य का देश (Land of Rising Sun) कहां जाता है, इसका कारण इसकी तीव्र उन्नति है।
        • जापान एक पर्वतीय देश है, जिसके 85 प्रतिशत भाग पर पर्वत श्रेणियां विस्तृत हैं जो टर्शियरी काल की है।
        • जापान के मध्य भाग में फैली हुई ज्वालामुखी पर्वतों की श्रंखला है, मध्यवर्ती भाग की घाटी में स्थित इस ज्वालामुखी पर्वत श्रृंखला को फोसा मैगना कहते हैं। जापान पृथ्वी के कमजोर क्षेत्र में स्थित है।
        • मध्य घाटी के दक्षिण की ओर फ्यूजीयामा जापान का सबसे ऊंचा ज्वालामुखी पर्वत है, जिसकी चोटी 3778 मीटर ऊंची है। जापान के निवासी फ्यूजीयामा को पवित्र पर्वत मानते हैं। फ्यूजीयामा को जापानी लोग स्वर्ग मानते हैं, इसके पूर्व में फिजोकू पर्वत है, जिससे गंधकीय गैस निकलती है, इसे जापान के लोग नर्क कहते हैं। फ्यूजीयामा एवं फिजोकू पर्वत के मध्य नितल क्षेत्र को नर्क से स्वर्ग का मार्ग कहते हैं।
        • पश्चिम की ओर स्थित हिंडा पर्वत श्रेणी जापान की उच्चतम पर्वत श्रेणी है, इसे जापानी आल्पस कहते हैं।
        • यारिंगा हिंडा पर्वत श्रेणी की सर्वोच्च चोटी है, इसे जापान का मैटरहॉर्न कहते हैं।
        • हिंडा पठार हिंडा पर्वत के पश्चिम में स्थित है। यह जापान का सबसे विकसित पठारी प्रदेश है, इसके पश्चिम बिवा झील स्थित है, जो जापान को मीठा जल प्रदान करने वाली सुंदर झील है।
        • क्वांटो मैदान जापान का सबसे महत्वपूर्ण मैदान है। यह होंशु द्वीप के पूर्वी तट पर स्थित है। टोक्यो, याकोहामा नगर यहीं स्थित है।
        • शिनामों जापान की सबसे बड़ी नदी है। यह 369 किमी लंबी है और होंशु द्वीप के उत्तरी भाग से निकलकर पर्वतीय भागों में प्रवाहित होते जापान सागर में गिरती है।
        • जापान में सर्वाधिक वर्षा विदेशी मुद्रा व्यापार बड़ानगर दक्षिणी पूर्वी तटीय भागों में होती है, जहां वर्षा की औसत 250 सेंमी है। वर्षा की मात्रा ग्रहण काल में अधिक होती है।
        • जून महीने में होने वाली वर्षा को बेर वर्षा कहते हैं। यह बेर के लिए लाभदायक होती है।
        • ग्रीष्म ऋतु में वर्षा दक्षिण पूर्वी मानसून से तथा टायफून चक्रवात से चक्रवातीय प्रकार की होती है। पश्चिमी जापान में शीत ऋतु में वर्षा होती है।
        • गेनया जापान में पाया जाने वाली घास एवं झाड़ियां हैं। जापान वन संपदा में धनी है। यहां चौड़ी पत्ती वाले वन अधिक पाए जाते हैं।
        • जापान में क्यूशू, शिकोशू विदेशी मुद्रा व्यापार बड़ानगर तथा दक्षिण होंशु में लाल मिट्टी का विस्तार है।

        जापान में कृषि :

          जापान का महत्वपूर्ण खाद्य फसल है। मुख्य चावल उत्पादन क्षेत्र मध्य होंशु, दक्षिण पश्चिम क्यूशू तथा शिकोकू द्वीप है। यहां चावल के तीन प्रकार होते हैं।
        1. हाटा यह तटीय मैदानी भागों में उत्पन्न किया जाता है।
        2. कोटा पहाड़ी भागों में उत्पन्न किया जाता है।
        3. टा दलदली भूमि उत्पन्न किया जाता है।
          • चाय में मुख्यत: हरी चाय का उत्पादन होता है। सैन्या जाति की चाय उत्तम किस्म की चाय है। शिजुनाओं प्रांत जापान का सबसे अधिक चाय का उत्पादन करता है।
          • होकैडो में कई विशाल डेयरी फार्म स्थित है।
          • सर्वाधिक मछली का उत्पादन होकैडो द्वीप के क्षेत्र में होता है। यहां क्यूरिशिवों एवं ओयाशिवों गर्म एवं ठंडी समुद्र जल धाराएं मिलती है, जो मत्स्यन का मुख्य क्षेत्र है। यहां मछलियों के अनुकूल जलवायु पाई जाती है। व्हेल मछली के उत्पादन में जापान विश्व में अग्रणी है।

          ये हैं भगवान श्रीकृष्ण के खास मंदिर, दर्शन से होता है उद्धार

          पूरे देश में भगवान श्रीकृष्ण के अत्यंत भव्य और विशाल मंदिर मौजूद हैं, जिसकी सुदरंता और भव्यता लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक कृष्णजी के मंदिर स्थापित हैं। इन मंदिरों में साल भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। देश भर के कृष्ण मंदिरों में विशेष प्रकार की रौनक देखने को मिलती है। प्रत्येक मंदिर की अपनी कुछ न कुछ खास विशेषता है। इनमें से कुछ मंदिर बेहद खास हैं। आइए जानते हैं, उन मंदिरों के बारे में

          ये वही स्थान है जहाँ श्री कृष्ण ने जन्म लिया था। मथुरा के मंदिर में विदेशी मुद्रा व्यापार बड़ानगर इसका सर्वोच्च स्थान है। यहाँ के स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मंदिर का निर्माण राजा वीर सिंह बुंदेल ने करवाया था जो श्री कृष्ण के ही वंशज थे। यहाँ कंस का पत्थर से बना बड़ा कारावास है। यहाँ का सबसे आकर्षक मंदिर का वो छोटा कारावास है जहाँ कृष्ण का जन्म हुआ था। यह मंदिर अपनी पवित्रता से आपके रोम.रोम को साधना में लीन कर देगा। बहुत ही खुबसूरती से इसे बनाया गया है। यहाँ कृष्ण की सफ़ेद मार्बल से बनी मूर्ति है जो अपने अस्तित्व का परिचय देती है। यहाँ आने का सबसे उचित समय है जन्माष्टमी व होली का पर्व। ये त्योहार भव्यता से यहाँ मनाया जाता है।

          रंग-ए -ज़ीस्त

          गृहलक्ष्मी Web Stories

          भगवान कृष्ण का जन्म तो मथुरा में हुआ था। लेकिन उनका बचपन गोकुलए वृंदावनए नंदगावए बरसाना जैसे जगहों पर बीता था। मथुरा से गोकुल 15 किलोमीटर दूर है। कहा जाता है कि यहां पर कृष्ण जी ने 11 साल 1 माह और 22 दिन गुजारे थे। यहां पर चौरासी खम्भों का मंदिर नंद बाबा के मंदिर से जुड़ी एक कहानी बताई जाती है। जिसमें कहा गया है कि भगवान श्री कृष्ण अपने माता.पिता को चार.धाम की विदेशी मुद्रा व्यापार बड़ानगर यात्रा का सुख गोकुल में ही देना चाहते थे इसलिए उन्होंने भगवान विश्वकर्मा से कहा था कि वो उनके घर में 84 खंबे लगा दें। इसपर विश्वकर्मा जी ने कहा था कि इन खंबों को कलियुग में कोई गिन नहीं पाएगा। इसीलिए ये मान्यता चली आ रही है कि अगर आप इस मंदिर के दर्शन करेंगे तो यहां पर आपको चार धाम की यात्रा का फल मिलेगा और साथ ही साथ आप इस मंदिर के खंबों को कभी गिन नहीं सकते। मान्यता है कि यहां या तो एक खंबा ज्यादा गिनती में आएगा या फिर एक खंबा कम।

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