ट्रेडिंग रणनीतियों की शब्दावली

स्मार्ट मनी एक शैक्षिक मंच है। एंजेल वन ने निवेश और व्यापार पर सैद्धांतिक अवधारणाओं को कवर करने के लिए लघु पाठ्यक्रम बनाए हैं। ये किसी भी तरह से संकेत नहीं हैं या बाजारों में मूल्य आंदोलन की भविष्यवाणी करने का प्रयास नहीं करते हैं। इसलिए सभी छात्रों को केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए पाठ्यक्रम सामग्री पर विचार करना चाहिए और उल्लिखित किसी भी उदाहरण, गणना या वास्तविक दुनिया की संस्थाओं को एंजेल वन के शोध विचारों या निवेश राय का संकेत या प्रतिनिधित्व नहीं माना जाना चाहिए।

स्मार्ट मनी विशेष रूप से शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है और निवेश पर कोई सलाह/सुझाव प्रदान नहीं करता है या किसी भी स्टॉक को खरीदने और बेचने की सिफारिश नहीं करता है। स्मार्ट मनी एक्सचेंज ट्रेडेड उत्पाद नहीं है और चार प्रकार की निवेश रणनीतियाँ क्या हैं? इससे संबंधित किसी भी विवाद को एक्सचेंज प्लेटफॉर्म पर नहीं निपटाया जाएगा।

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एंजेल वन लिमिटेड (चार प्रकार की निवेश रणनीतियाँ क्या हैं? जिसे पहले एंजेल ब्रोकिंग लिमिटेड के नाम से जाना जाता था), पंजीकृत कार्यालय: जी -1, आकृति ट्रेड सेंटर, रोड नंबर 7, एमआईडीसी, अंधेरी (ई), मुंबई - 400 093। सीआईएन: एल 67120 एमएच1996पीएलसी 101709, सेबी रेग। नंबर: INZ000161534-BSE कैश/F&O/CD (सदस्य आईडी: 612), NSE कैश/F&O/CD (सदस्य आईडी: 12798), MSEI कैश/F&O/CD(सदस्य आईडी: 10500), MCX कमोडिटी डेरिवेटिव्स (सदस्य आईडी) : 12685) और एनसीडीईएक्स कमोडिटी डेरिवेटिव्स (सदस्य आईडी: 220), सीडीएसएल पंजीकरण। संख्या: IN-DP-384-2018, PMS Regn। नंबर: INP000001546, रिसर्च एनालिस्ट SEBI Regn। नंबर: INH000000164, निवेश सलाहकार SEBI Regn। नंबर: INA000008172, AMFI Regn। संख्या: एआरएन-77404, पेर्डा पंजीकरण संख्या 19092018। अनुपालन अधिकारी: सुश्री ऋचा घोष।

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क्‍या हैं बिजनेस साइकल फंड और क्‍यों करें इनमें निवेश, जानें एक्‍सपर्ट की राय

What Are Business Cycle Funds And Why Should Investors Invest in It

नई दिल्‍ली, पंकज मठपाल। म्युचअल फंड जो निवेशकों के पैसों को शेयर बाजार में निवेश करते उन्हें हम इक्विटी फंड के रूप में जानते हैं लेकिन सभी इक्विटी फंड एक जैसे नहीं होते। ये फंड जिस प्रकार के शेयरों में निवेश करते हैं और इनकी निवेश की जो रणनीति होती है उसके के आधार पर इन्हें विभिन्न वर्गों में बाटा जा सकता हैं। अर्थव्यवस्था में तेजी और मंदी का क्रम चलता रहता है। जिस तरह मौसम का एक चक्र होता है यानि सर्दी के बाद गर्मी और उसके बाद बरसात उसी प्रकार अर्थव्यवस्था में भी अलग-अलग चरण होते हैं और हर चरण में एक अलग बिजनेस साइकल होती है। साथ ही उद्योग जगत में अलग अलग सेक्टर होते हैं जैसे की बैंकिंग, फार्मास्यूटिकल, एफएमसीजी, आईटी, इत्यादि और हर एक सेक्टर में कई कंपनियां होती हैं। हर बिजनेस साइकल में निवेश चार प्रकार की निवेश रणनीतियाँ क्या हैं? का एक अनोखा अवसर होता है। जिस तरह हर मौसम में हमारे रहन-सहन, खान-पान इत्यादि में बदलाव आता है उसी प्रकार अलग-अलग बिजनेस साइकल में ये सेक्टर एक दूसरे से बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता रखते हैं। बिजनेस साइकल के अनुरूप यदि सेकटर का चुनाव करके निवेश के लिए उस सेक्टर से जुड़े शेयरों का पोर्टफोलियो बनाया जाए तो बेहतर मुनाफा मिलने की उम्मीद की जा सकती है।

Investment lesson for investors from football (Jagran File Photo)

बिजनेस साइकल फंड की विशेषता

बिजनेस साइकल फंड एक तरह के थीमैटिक फंड हैं। थीमैटिक फंड का मतलब होता है कि कुछ चुनिंदा सेक्टर का पोर्टफोलियो जो किसी न किसी तरह से एक-दूसरे से संबंधित हों। उदाहरण के तौर पर यदि हम एक इंफ्रास्ट्रक्टर थीम की बात करें तो उसमे पावर, सीमेंट, टेलीकॉम, सर्विसेज जैसे सेक्टर शामिल होंगे। वहीं, यदि हम कंजंप्‍शन थीम की बात करें तो उसमें एफएमसीजी, सर्विसेज, बैंकिंग, आईटी इत्यादि सेक्टर्स हो सकते हैं। लेकिन बिजनेस साइकल फंड में ऐसा नहीं है यहां पर बिजनेस साइकल के मुताबिक सेक्टर में बदलाव किया जा सकता है। यानि कि बिजनेस साइकल फंड दूसरे थीमेटिक फंड से कई मायनों में अलग होते हैं। सामान्य तौर पर किसी थीमेटिक फंड के पोर्टफोलियो में उस थीम से संबंधित कुछ चुनिंदा सेक्टर्स हो सकते हैं किन्तु एक बिजेनस साइकल फंड का निवेश सभी तरह से सेक्ट्स और सभी तरह के मार्केट कैप वाले स्टॉक्स में हो सकता है। जोखिम की दृष्टि से थीमेटिक फंड को सेक्टोरल फंड और डाइवर्सिफाइड फंड के बीच रखा जा सकता है। जहां एक सेक्टोरल फंड एक ही सेक्टर के शेयरों में निवेश करता है वहीं एक डाइवर्सिफिएड फंड में सभी सेक्टर की कंपनियों में निवेश का अवसर होता है। एक बिजनेस साइकल फंड की तुलना एक डाइवर्सिफाइड फंड से की जाये तो जहां एक ओर एक डाइवर्सिफाइड फंड के पोर्टफोलियो में हर बिजनेस साइकल में हर प्रकार के सेक्टर शामिल हो सकते हैं वहीं एक बिजनेस साइकल फंड में सेक्टर्स का रोटेशन होता रहता है।

बिजनेस साइकल के अनुसार जिन सेक्टर से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद की जाती है उन सेक्टर को इस तरह के फंड के पोर्टफोलियो में शामिल किया जाता है। सामान्यतया चयन की एक विशेष प्रक्रिया के आधार पर पहले बिजनेस साइकल के अनुरूप सेक्टर का चुनाव किया जाता है और फिर उन सेक्टर के आर्थिक तौर पर मजबूत कंपनियां चुनी चार प्रकार की निवेश रणनीतियाँ क्या हैं? जाती हैं। बिजनेस साइकल फंड के पोर्टफोलियो में डिफेन्सिव और नॉन-डिफेंसिव सेक्टर हो सकते हैं। डिफेंसिव सेक्टर जैसे कि फार्मास्यूटिकल, एफएमसीजी, आईटी और टेलीकॉम इत्यादि स्थिर होते हैं और ये सेक्टर आर्थिक मंदी के दौर में भी ठीक प्रदर्शन कर सकते हैं किन्तु नॉन-डिफेंसिव सेक्टर जैसे कि फाइनेंशियल, इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑटोमोबाइल, सीमेंट इत्यादि आर्थिक तेजी के दौर में बेहतर प्रदर्शन करते हैं।

निवेश के पीछे तर्क

शेयर बाजार का प्रदर्शन काफी हद तक बिजनेस साइकल पर निर्भर होता है और क्योंकि एक बिजनेस साइकल फंड में सेक्टर का रोटेशन होता है इसलिए इस श्रेणी के फंड सभी परिस्थियों में अच्छा प्रदर्शन करने की क्षमता रखते हैं। एक बिजनेस साइकल चार प्रकार की निवेश रणनीतियाँ क्या हैं? में चार चरण होते हैं- विस्तार, पीक यानि तेजी, कॉन्ट्रैक्शन यानि संकुचन और स्लंप यानि मन्दी। अक्सर देखा गया है कि बिजनेस साइकल के बदलाव पर कुछ शेयरों का प्रदर्शन भी बदल जाता है। ऐसे में यदि निवेश का पोर्टफोलियो बिजनेस साइकल के अनुरूप हो तो इससे बेहतर रिटर्न की उम्मीद की जा सकती है।

किसके लिए है उपयुक्त

ऐसे निवेशक जो शेयर बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव को समझते हैं और उससे संबंधित जोखिम को सहने की सहने की क्षमता रखते हैं वे 5 वर्ष या उससे अधिक अवधि के नजरिये से इस तरह के फंड में निवेश करके अच्छे लाभ की उम्मीद कर सकते हैं। बिजनेस साइकल फंड में एकमुश्त और एसआईपी के जरिये किस्तों में निवेश किया जा सकता है किन्तु वर्तमान स्थिति में जब बाजार अपने उच्चतम स्तरों के आसपास है तब एसआईपी के जरिये निवेश करना बेहतर साबित हो सकता है। इस कैटेगरी में अब तक आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल बिजनेस साइकल फंड, टाटा बिजनेस साइकल फंड और एल एन्ड टी बिजनेस साइकल फंड जैसे कुछ चुनिंदा फंड हैं और अब 15 नवम्बर से आदित्य बिरला सन लाइफ का न्यू फंड ऑफर यानि कि एनएफओ खुला है जो कि 29 नवंबर तक खुला रहेगा। यह एक ओपन एंडेड फंड है इसलिए एनएफओ बंद होने के बाद भी यह फंड खरीदी और बिक्री के लिए उपलब्ध रहेगा।

(लेखक ऑप्टिमा मनी मैनेजर्स के फाउंडर एवं सीईओ हैं। प्रकाशित विचार उनके निजी हैं। निवेश से पहले अपने निवेश सलाहकार की सलाह अवश्‍य लें।)

क्‍या हैं बिजनेस साइकल फंड और क्‍यों करें इनमें निवेश, जानें एक्‍सपर्ट की राय

What Are Business Cycle Funds And Why Should Investors Invest in It

नई दिल्‍ली, पंकज मठपाल। म्युचअल फंड जो निवेशकों के पैसों को शेयर बाजार में निवेश करते उन्हें हम इक्विटी फंड के रूप में जानते हैं लेकिन सभी इक्विटी फंड एक जैसे नहीं होते। ये फंड जिस प्रकार के शेयरों में निवेश करते हैं और इनकी निवेश की जो रणनीति होती है उसके के आधार पर इन्हें विभिन्न वर्गों में बाटा जा सकता हैं। अर्थव्यवस्था में तेजी और मंदी का क्रम चलता रहता है। जिस तरह मौसम का एक चक्र होता है यानि सर्दी के बाद गर्मी और उसके बाद बरसात उसी प्रकार अर्थव्यवस्था में भी अलग-अलग चरण होते हैं और हर चरण में एक अलग बिजनेस साइकल होती है। साथ ही उद्योग जगत में अलग अलग सेक्टर होते हैं जैसे की बैंकिंग, फार्मास्यूटिकल, एफएमसीजी, आईटी, इत्यादि और हर एक सेक्टर में कई कंपनियां होती हैं। हर बिजनेस साइकल में निवेश का एक अनोखा अवसर होता है। जिस तरह हर मौसम में हमारे रहन-सहन, खान-पान इत्यादि में बदलाव आता है उसी प्रकार अलग-अलग बिजनेस साइकल में ये सेक्टर एक दूसरे से बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता रखते हैं। बिजनेस साइकल के अनुरूप यदि सेकटर का चुनाव करके निवेश के लिए उस सेक्टर से जुड़े शेयरों का पोर्टफोलियो बनाया जाए तो बेहतर मुनाफा मिलने की उम्मीद की जा सकती है।

Investment lesson for investors from football (Jagran File Photo)

बिजनेस साइकल फंड की विशेषता

बिजनेस साइकल फंड एक तरह के थीमैटिक फंड हैं। थीमैटिक फंड का मतलब होता है कि कुछ चुनिंदा सेक्टर का पोर्टफोलियो जो किसी न किसी तरह से एक-दूसरे से संबंधित हों। उदाहरण के तौर पर यदि हम एक इंफ्रास्ट्रक्टर थीम की बात करें तो उसमे पावर, सीमेंट, टेलीकॉम, सर्विसेज जैसे सेक्टर शामिल होंगे। वहीं, यदि हम कंजंप्‍शन थीम की बात करें तो उसमें एफएमसीजी, सर्विसेज, बैंकिंग, आईटी इत्यादि सेक्टर्स हो सकते हैं। लेकिन बिजनेस साइकल फंड में ऐसा नहीं है यहां पर बिजनेस साइकल के मुताबिक सेक्टर में बदलाव किया जा सकता है। यानि कि बिजनेस साइकल फंड दूसरे थीमेटिक फंड से कई मायनों में अलग होते हैं। सामान्य तौर पर किसी थीमेटिक फंड के पोर्टफोलियो में उस थीम से संबंधित कुछ चुनिंदा सेक्टर्स हो सकते हैं किन्तु एक बिजेनस साइकल फंड का निवेश सभी तरह से सेक्ट्स और सभी तरह के मार्केट कैप वाले स्टॉक्स में हो सकता है। जोखिम की दृष्टि से थीमेटिक फंड को सेक्टोरल फंड और डाइवर्सिफाइड फंड के बीच रखा जा सकता है। जहां एक सेक्टोरल फंड एक ही सेक्टर के शेयरों में निवेश करता है वहीं एक डाइवर्सिफिएड फंड में सभी सेक्टर की कंपनियों में निवेश का अवसर होता है। एक बिजनेस साइकल फंड की तुलना एक डाइवर्सिफाइड फंड से की जाये तो जहां एक ओर एक डाइवर्सिफाइड फंड के पोर्टफोलियो में हर बिजनेस साइकल में हर प्रकार के सेक्टर शामिल हो सकते हैं वहीं एक बिजनेस साइकल फंड में सेक्टर्स का रोटेशन होता रहता है।

बिजनेस साइकल के अनुसार जिन सेक्टर से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद की जाती है उन सेक्टर को इस तरह के फंड के पोर्टफोलियो में शामिल किया जाता है। सामान्यतया चयन की एक विशेष प्रक्रिया के आधार पर पहले बिजनेस साइकल के अनुरूप सेक्टर का चुनाव किया जाता है और फिर उन सेक्टर के आर्थिक तौर पर मजबूत कंपनियां चुनी जाती हैं। बिजनेस साइकल फंड के पोर्टफोलियो में डिफेन्सिव और नॉन-डिफेंसिव सेक्टर हो सकते हैं। डिफेंसिव सेक्टर जैसे कि फार्मास्यूटिकल, एफएमसीजी, आईटी और टेलीकॉम इत्यादि स्थिर होते हैं और ये सेक्टर आर्थिक मंदी के दौर में भी ठीक प्रदर्शन कर सकते हैं किन्तु नॉन-डिफेंसिव सेक्टर जैसे कि फाइनेंशियल, इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑटोमोबाइल, सीमेंट इत्यादि आर्थिक तेजी के दौर में बेहतर प्रदर्शन करते हैं।

निवेश के पीछे तर्क

शेयर बाजार का प्रदर्शन काफी हद तक बिजनेस साइकल पर निर्भर होता है और क्योंकि एक बिजनेस साइकल फंड में सेक्टर का रोटेशन होता है इसलिए इस श्रेणी के फंड सभी परिस्थियों में अच्छा प्रदर्शन करने की क्षमता रखते हैं। एक बिजनेस साइकल में चार चरण होते हैं- विस्तार, पीक यानि तेजी, कॉन्ट्रैक्शन यानि संकुचन और स्लंप यानि मन्दी। अक्सर देखा गया है कि बिजनेस साइकल के बदलाव पर कुछ शेयरों का प्रदर्शन भी बदल जाता है। ऐसे में यदि निवेश का पोर्टफोलियो बिजनेस साइकल के अनुरूप हो तो इससे बेहतर रिटर्न की उम्मीद की जा सकती है।

किसके लिए है उपयुक्त

ऐसे निवेशक जो शेयर बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव को समझते हैं और उससे संबंधित जोखिम को सहने की सहने की क्षमता रखते हैं वे 5 वर्ष या उससे अधिक अवधि के नजरिये से इस तरह के फंड में निवेश करके अच्छे लाभ की उम्मीद कर सकते हैं। बिजनेस साइकल फंड में एकमुश्त और एसआईपी के जरिये किस्तों में निवेश किया जा सकता है किन्तु वर्तमान स्थिति में जब बाजार अपने उच्चतम स्तरों के आसपास है तब एसआईपी के जरिये चार प्रकार की निवेश रणनीतियाँ क्या हैं? निवेश करना बेहतर साबित हो सकता है। इस कैटेगरी में अब तक आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल बिजनेस साइकल फंड, टाटा बिजनेस साइकल फंड और एल एन्ड टी बिजनेस साइकल फंड जैसे कुछ चुनिंदा फंड हैं और अब 15 नवम्बर से आदित्य बिरला सन लाइफ का न्यू फंड ऑफर यानि कि एनएफओ खुला है जो कि 29 नवंबर तक खुला रहेगा। यह एक ओपन एंडेड फंड है इसलिए एनएफओ बंद होने के बाद भी यह फंड खरीदी और बिक्री के लिए उपलब्ध रहेगा।

(लेखक ऑप्टिमा मनी मैनेजर्स के फाउंडर एवं सीईओ हैं। प्रकाशित विचार उनके निजी हैं। निवेश से पहले अपने निवेश सलाहकार की सलाह अवश्‍य लें।)

क्या हैं डायनेमिक एसेट एलोकेशन रणनीति के फायदे?

बड़ी गिरावट के बाद भी प्रमुख सूचकांक अपनी दीर्घकालिक औसत वैल्यूएशन की तुलना में प्रीमियम पर कारोबार कर रहे हैं.

क्या हैं डायनेमिक एसेट एलोकेशन रणनीति के फायदे?

प्रश्न: डायनेमिक एसेट आवंटन फंड और डायवर्सिफाइड इक्विटी फंड में क्या अंतर है?
उत्तर: अपने निवेश के सिद्धांत (मैनेडट) के अनुसार डायवर्सिफाइड इक्विटी म्यूचुअल फंड्स अपना पूरे फंड का निवेश करते हैं. वे अपने पास नकद नहीं रखते. स्वतंत्रता के अनुसार वे डेट और इक्विटी के मिश्रण में निवेश कर सकते हैं. बाजार से स्थिति के अनुसार वे इनकी हिस्सेदारी कम या ज्यादा कर सकते हैं.

वैल्यूएशन कम होने के समय में इक्विटी निवेश बढ़ाते है और इसमें इजाफा होने पर वे डेट को प्राथमिकता देते हैं. इक्विटी में निवेश की हिस्सेदारी 100 फीसदी भी हो सकती है और 0 फीसदी भी. अहम यह है कि फंड हाउस आंकलन के लिए किस तरह की रणनीति का इस्तेमाल करता है.

इस प्रकार के आंकलन के लिए एक फंड निफ्टी 50, प्राइस-टु-बुक वैल्यू और किसी अन्य रणनीति का इस्तेमाल कर सकता है. अधिकांश फंड हाउस अपनी वैल्यूएशन 30 से 80 फीसदी के बीच रखते हैं. मौजूदा समय में वैल्यूएशन काफी अधिक हैं. इस वजह से इक्विटी हिस्सेदारी 30 से 40 फीसदी के बीच है.

प्रश्न: एडवाइजर नए इक्विटी निवेशकों को इनमें निवेश की सलाह क्यों देते हैं?
उत्तर: म्यूचुअल फंड्स के जरिए बड़ी संख्या में पहली दफा निवेश करने वाले निवेशक इक्विटी और उसके जोखिमों से दो-चार होते हैं. वे अपने पैसे को एफडी से निकाल कर बाजार में डालते हैं. वे उतार-चढ़ाव से बचना चाहते हैं. बाजार की बड़ी गिरावट उन्हें झटका दे सकती है.

Mutual Fund.

ऐसे में जरूरी है कि नए निवेशकों का मनोबल कमजोर न होने दिया जाए और उन्हें डेट और इक्विटी के मिश्रण का बेहतरीन विकल्प पेश किया जाए, जो शुद्ध इक्विटी फंड्स के मुकाबले सुरक्षित हो. ऐसे में फाइनेंशियल प्लानर्स का मानना है कि डायवर्सिफाइड इक्विटी फंड्स निवेशकों को यह जरूरत पूरी कर सकते हैं.

प्रश्न: डायनेमिक एसेट आवंटन फंड कमाई कैसे करते हैं?
उत्तर: डायनेमिक आवंटन फंड्स का इस्तेमाल बेहतर संतुलन के लिए किया जाता है. यह नए निवेशकों के लिए बढ़िया चार प्रकार की निवेश रणनीतियाँ क्या हैं? विकल्प साबित हो सकते हैं, जिनकी जोखिम क्षमता कम है. यदि बाजार लंबे समय तक गिरावट देखता है, तो इक्विटी फंडों का एनएवी काफी नीचे चला जाता है.

हालांकि, निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि ये फंड अधिक डेट भी रख सकते हैं. इस वजह से ये विपरीत समय में रक्षा कवच प्रदान कर सकते हैं. हालांकि, इस वजह से वे कई दफा इक्विटी म्यूचुअल फंड्स से रिटर्न के मामले में पिछड़ भी सकते हैं.

इसे भी पढ़ें: कैसे रुपये की गिरावट रोक सकता है रिजर्व बैंक?

प्रश्न: इन फंड्स पर टैक्स किस तरह लागू होता है?

उत्तर: ऐसे फंडों का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इनकी संरचना ऐसी बनाई गई है, जिससे इन पर टैक्स वैसे ही लागू होता है, जैसे इक्विटी फंड्स पर. जब यह फंड अपना इक्विटी निवेश कम करता है, तो सुनिश्चित किया जाता है कि इक्विटी और आर्बिट्राज हिस्सेदारी कम से कम 65 फीसदी हो.

इससे यह स्कीम इक्विटी स्कीम की तरह टैक्स दायरे में आ जाती है. निवेशकों को एक साल से अधिक समय तक यूनिट रखने पर 10 फीसदी लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स चुकाना होता है.

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